उसकी कलम से इससे भी बढ़कर फ़साने लिखे जायेगें। उसकी कलम से इससे भी बढ़कर फ़साने लिखे जायेगें।
रहता है...आपस में बिछड़ने का गम, बस हमारी यही धारणा पवित्र है। रहता है...आपस में बिछड़ने का गम, बस हमारी यही धारणा पवित्र है।
केसरिया, हरा, सफ़ेद तीनो रंगों को एक साथ कर दूं सारे हिंदुस्तानियों के चेहरे पे उसको म केसरिया, हरा, सफ़ेद तीनो रंगों को एक साथ कर दूं सारे हिंदुस्तानियों के चेहरे ...
रात के दो पहर ही होते हैं रात के दो पहर ही होते हैं
निढाल शरीर को सहलाती हैं मेरे चाँद की शीतल किरणें निढाल शरीर को सहलाती हैं मेरे चाँद की शीतल किरणें
ज़रा सोचा है कैसे मैं जियूँगा, दिया जो ज़ख्म है वो कैसे सियूँगा। ज़रा सोचा है कैसे मैं जियूँगा, दिया जो ज़ख्म है वो कैसे सियूँगा।